Indian family discussing investment decisions after hearing Robert Kiyosaki’s financial advice.

रॉबर्ट कियोसाकी की ये पैसे वाली सलाह फिर हुई वायरल — क्या भारतीयों को माननी चाहिए?

April 29, 2026

हर बार जब रॉबर्ट कियोसाकी पैसों को लेकर कुछ बोलते हैं, इंटरनेट अचानक एक्टिव हो जाता है।

कुछ लोग उन्हें फाइनेंशियल जीनियस मानते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि उनकी सलाह आम लोगों के लिए बहुत ज्यादा risky होती है। लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है — जब भी Rich Dad Poor Dad के लेखक cash, gold, real estate या Bitcoin पर बात करते हैं, लाखों लोग ध्यान से सुनते हैं।

और अब एक बार फिर उनके नए बयान ने ऑनलाइन बहस छेड़ दी है।

इस बार चर्चा सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत में भी YouTube, Instagram और finance groups पर लोग यह बहस कर रहे हैं कि क्या कियोसाकी की सलाह आज की economy में सच में सही बैठती है। खासकर ऐसे समय में जब inflation लगातार बढ़ रही है, bank FD returns “ठीक-ठाक” लग रहे हैं लेकिन exciting नहीं, और युवा भारतीय तेजी से wealth build करने के तरीके ढूंढ रहे हैं।

तो आखिर उन्होंने ऐसा क्या कहा?

हाल ही में रॉबर्ट कियोसाकी ने फिर से लोगों को traditional savings और paper money पर ज्यादा निर्भर न रहने की चेतावनी दी। उनका मानना है कि gold, silver और Bitcoin जैसे assets भविष्य में ज्यादा valuable हो सकते हैं, खासकर अगर global economies पर financial pressure बढ़ता है।

स्वाभाविक है कि इस बयान के बाद लोगों की strong reactions आईं।

क्योंकि एक average भारतीय परिवार के लिए “safe money” का मतलब हमेशा कुछ simple चीजें रही हैं — bank FD, LIC, savings account, थोड़ा बहुत जमीन में निवेश, और locker में रखा gold jewellery। Risk लेना हर किसी की पसंद नहीं होती। आज भी parents अक्सर कहते हैं, “Beta, FD kara do. Safe rahega.”

लेकिन नई generation अलग तरह से सोच रही है।

बेंगलुरु में काम करने वाला 24 साल का एक युवा professional शायद पहले से SIPs, crypto, US stocks और side hustle income जैसी चीजों में invest कर रहा हो। वहीं उसके पिता fixed deposit पर ज्यादा भरोसा करते हों। यही सोच का फर्क भारत में कियोसाकी की सलाह को इतना बड़ा discussion topic बना देता है।

दिलचस्प बात यह है कि वह सिर्फ अमीर बनने की बात नहीं करते। वह यह समझाने की कोशिश करते हैं कि पैसा असल में काम कैसे करता है।

और सच कहें तो, यही बात कई लोगों को uncomfortable कर देती है।

मान लीजिए किसी व्यक्ति के savings account में कई सालों से ₹5 लाख पड़े हैं। तकनीकी रूप से पैसा “safe” है। लेकिन अगर inflation उस पैसे पर मिलने वाले interest से तेजी से बढ़ती रहे, तो धीरे-धीरे उस पैसे की purchasing power कम होने लगती है। Grocery, school fees, petrol, rent, medical bills — सब कुछ महंगा होता जाता है, जबकि पैसा बहुत धीरे बढ़ता है।

कियोसाकी अक्सर इसी डर की बात करते हैं।

उनका मानना है कि लोगों को ऐसे assets पर ध्यान देना चाहिए जिनकी value समय के साथ बढ़ सके, बजाय सिर्फ पैसा जमा करके रखने के।

लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि हर भारतीय को अपनी सारी savings अचानक Bitcoin या gold में डाल देनी चाहिए?

बिल्कुल नहीं।

यहीं पर इंटरनेट अक्सर उनके message को गलत समझ लेता है।

भारत के financial experts भी बार-बार कहते हैं कि बिना risk समझे aggressive investing करना नुकसानदायक हो सकता है। हमने crypto crashes के दौरान यह देखा भी है, जब कई युवा investors viral videos देखकर peak price पर market में घुस गए और बाद में market गिरने पर panic करने लगे।

कियोसाकी की बातें एक “wake-up call” की तरह काम करती हैं, लेकिन उन्हें blindly follow करना अलग बात है।

अब gold की बात करें।

भारतीय परिवार पीढ़ियों से gold पर भरोसा करते आए हैं, लेकिन ज्यादातर emotional reasons से — शादी, त्योहार, family security। आज की younger generation gold को अलग नजर से देख रही है। सिर्फ jewellery नहीं, बल्कि digital gold, gold ETFs और sovereign gold bonds जैसे options भी popular हो रहे हैं। लोग इसे uncertain times में protection की तरह देखते हैं।

और सच कहें तो, पिछले कुछ सालों ने इस सोच को मजबूत भी किया है। जब भी global tensions बढ़ती हैं या markets unstable होते हैं, gold prices फिर चर्चा में आ जाते हैं।

लेकिन gold की भी अपनी limitations हैं।

यह लंबे समय तक value protect कर सकता है, लेकिन business या rental property की तरह regular income generate नहीं करता। इसलिए सिर्फ gold पर depend रहना भी perfect strategy नहीं है।

कुछ ऐसी ही debate Bitcoin को लेकर भी है।

कुछ भारतीयों के लिए Bitcoin future technology और financial freedom का symbol है। वहीं दूसरों के लिए यह सिर्फ gambling जैसा लगता है।

और सच यह है कि दोनों सोच अपने-अपने तरीके से सही हैं।

दिल्ली का कोई college student proudly कह सकता है कि उसने market dip में crypto खरीदा, जबकि एक retired government employee शायद crypto को छूना भी पसंद न करे। Life stages अलग होने से risk लेने की क्षमता भी अलग होती है। लेकिन social media discussions में यह बात अक्सर ignore हो जाती है।

कियोसाकी एक चीज बहुत effectively करते हैं — वह traditional “पढ़ो, नौकरी करो, पैसे बचाओ” वाले formula को challenge करते हैं।

भारत में यह बात अलग तरीके से असर करती है।

क्योंकि करोड़ों middle-class families इसी mindset के साथ बड़ी हुई हैं। Stable salary, अगर possible हो तो government job, controlled spending और retirement security। और इसमें कोई बुराई भी नहीं है। कई परिवारों के लिए इसी सोच ने सालों की financial struggle के बाद stability दी है।

लेकिन दुनिया बदल चुकी है।

आज के युवा rising living costs, expensive housing, unstable job markets और लगातार digital influence का सामना कर रहे हैं। वे influencers को 30 की उम्र में financial freedom, early retirement, passive income और multiple income streams की बातें करते देखते हैं। ऐसे में पुरानी financial rules पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

और यहीं पर कियोसाकी फिर relevant हो जाते हैं।

इसलिए नहीं कि उनकी हर prediction सही साबित होती है, बल्कि इसलिए कि वह लोगों को पैसों को लेकर अलग तरीके से सोचने पर मजबूर करते हैं।

भारत में भी pandemic के बाद investing awareness तेजी से बढ़ी है। पहले stock market की बातें सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित थीं। अब छोटे शहरों के लोग भी अपने फोन पर SIP returns, mutual fund apps और market news regularly check करते हैं।

UPI ने spending habits बदल दीं।

Fintech apps ने investing habits बदल दीं।

और social media ने financial conversations को पूरी तरह बदल दिया।

लेकिन इस trend का एक दूसरा side भी है, जिसके बारे में कम बात होती है।

आज कई युवा बहुत जल्दी अमीर बनने का pressure महसूस करते हैं।

और यही pressure खतरनाक हो सकता है।

जब लोग “cash is trash” या “buy assets immediately” जैसी बातें सुनते हैं, तो कई बार बिना emergency fund, insurance, debt management या diversification समझे emotional decisions लेने लगते हैं।

जिस व्यक्ति पर high-interest credit card debt हो, उसे शायद risky investments से पहले financial stability की जरूरत है।

जिस परिवार पर भारी EMI चल रही हो, उसे aggressive wealth strategies से पहले बेहतर budgeting की जरूरत हो सकती है।

भारत में यह practical side बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की financial realities पश्चिमी देशों से काफी अलग हैं।

ज्यादातर भारतीय परिवारों के लिए आज भी stability, “जल्दी अमीर बनने” से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

और शायद यही इस पूरी debate का असली lesson भी है।

न आंख बंद करके डरना।

न आंख बंद करके excitement में बहना।

बस थोड़ी ज्यादा समझदारी।

रॉबर्ट कियोसाकी को ऐसा गुरु मानने के बजाय जिसकी हर बात follow करनी जरूरी हो, शायद उनकी सलाह को पुराने financial habits पर सवाल उठाने की शुरुआत की तरह देखना बेहतर होगा।

क्या inflation को ignore करना चाहिए? शायद नहीं।

क्या लोगों को जल्दी investing सीखनी चाहिए? बिल्कुल हां।

क्या भारतीयों को जिंदगीभर सिर्फ एक income source पर depend रहना चाहिए? आज की दुनिया में शायद नहीं।

लेकिन क्या common families को अचानक savings, FDs या secure investments पूरी तरह छोड़ देने चाहिए? यह भी practical नहीं लगता।

असल में, ज्यादातर सफल भारतीय investors quietly एक balanced approach follow करते हैं।

कुछ पैसा safe रहता है।

कुछ पैसा धीरे-धीरे grow करता है।

और कुछ पैसा calculated risk लेता है।

यह balance Instagram reels पर exciting नहीं दिखता, लेकिन real life में अक्सर ज्यादा बेहतर काम करता है।

और शायद यही वजह है कि रॉबर्ट कियोसाकी की सलाह हर कुछ महीनों में फिर चर्चा में आ जाती है। क्योंकि लोग जानते हैं कि financial दुनिया तेजी से बदल रही है — लेकिन सही strategy आखिर क्या होनी चाहिए, इसे लेकर अभी भी पूरी clarity किसी के पास नहीं है।

भारतीय users के लिए शायद सबसे समझदारी वाली बात यह नहीं है कि “old-school saving” और “modern investing” में से किसी एक को चुना जाए।

बल्कि असली समझदारी शायद दोनों को balance करके इस्तेमाल करने में है।

रॉबर्ट कियोसाकी की नई money advice भारत में बहस का कारण बनी हुई है क्योंकि वह लोगों को सिर्फ savings पर निर्भर रहने के बजाय gold और Bitcoin जैसे assets पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। जहां कई युवा investors उनकी बातों को exciting मानते हैं, वहीं experts चेतावनी देते हैं कि बिना financial planning के ज्यादा risk लेना नुकसानदायक हो सकता है।

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लेखक
लक्ष्य भारद्वाज

लक्ष्य भारद्वाज

कंटेंट हेड (HOC)

भारतीय सरकारी योजनाओं और बैंकिंग नीतियों के विशेषज्ञ वित्तीय विश्लेषक।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न