योगी का नया फरमान: सिर्फ डिग्री नहीं, अब राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी अलीगढ़ से निकलेंगे जॉब-रेडी छात्र
अवलोकन (Overview)
सीएम योगी आदित्यनाथ ने RMPSU अलीगढ़ में रोजगारपरक, उद्योग से जुड़े और स्किल बेस्ड कोर्स शुरू करने के निर्देश दिए।

योगी का नया फरमान: सिर्फ डिग्री नहीं, अब अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से निकलेंगे जॉब-रेडी छात्र
सोमवार, 22 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिवसीय अलीगढ़ दौरे की शुरुआत करते हुए सीधे राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय (RMPSU) पहुंचे। हेलीकॉप्टर से आईटीएम कॉलेज, करसुआ उतरने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला सीधा लोधा स्थित विश्वविद्यालय परिसर की ओर रवाना हुआ, जहां कुलपति प्रो. एन.बी. सिंह ने उनका स्वागत किया।

यह कोई सामान्य निरीक्षण नहीं था। मुख्यमंत्री ने लगभग एक घंटे तक परिसर की इमारतों, बुनियादी सुविधाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया, इसके बाद समीक्षा बैठक में बैठे और कैंपस में ही भोजन भी किया। लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि सीएम ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया — डिग्री बांटने से काम नहीं चलेगा, छात्रों के हाथ में नौकरी लायक हुनर होना चाहिए।
अलीगढ़ को क्यों चुना गया?
यह कोई इत्तेफाक नहीं है कि यह निर्देश अलीगढ़ में ही दिया गया। शहर दुनिया भर में "ताला नगरी" के नाम से मशहूर है, यहां हार्डवेयर और मेटलवेयर का बड़ा औद्योगिक आधार मौजूद है। इसके अलावा अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर, आगरा, झांसी और चित्रकूट के साथ डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का भी एक नोड बन रहा है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और स्थानीय उद्योगों से जोड़ने पर खास जोर दिया, ताकि विश्वविद्यालय सिर्फ डिग्री फैक्ट्री न बने, बल्कि अलीगढ़ के मौजूदा उद्योगों के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करने वाला केंद्र बने।
दरअसल यह सोच नई नहीं है। 14 सितंबर 2021 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी थी, तब भी मुख्यमंत्री ने इसे अलीगढ़ की हार्डवेयर इंडस्ट्री और क्षेत्रीय विकास से जोड़ने की बात कही थी। चार साल बाद, जब कैंपस अब लगभग चालू हो चुका है और अलीगढ़, हाथरस, कासगंज व एटा के लगभग 400 कॉलेज इससे संबद्ध हैं, सरकार अब उस मूल सोच को रोजगार-केंद्रित नजरिए से आगे बढ़ा रही है।
यूपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा
यह कदम यूपी सरकार की बड़ी आर्थिक रणनीति से भी जुड़ा है। योगी सरकार पिछले कुछ वर्षों में एमएसएमई, ओडीओपी और औद्योगिक कॉरिडोर पर लगातार जोर दे रही है, और अधिकारियों का मानना है कि राज्य के आर्थिक लक्ष्य तब तक पूरे नहीं हो सकते जब तक विश्वविद्यालय ऐसे ग्रेजुएट तैयार करते रहेंगे जिनकी बाजार में मांग ही नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार यूपी के एमएसएमई सेक्टर में ही करीब 3.11 करोड़ लोग रोजगार पा रहे हैं, और राज्य इस वर्कफोर्स को आगे बढ़ाने के लिए स्किल-आधारित शिक्षा पर बड़ा दांव लगा रहा है।
विश्वविद्यालय के निर्माण में पहले सामने आई दीवारों में दरारें जैसी तकनीकी खामियों को देखते हुए, मुख्यमंत्री का यह दौरा गुणवत्ता और प्रगति जांचने का भी एक मौका रहा, जिसके लिए प्रशासन पहले से ही पूरी तैयारी में जुटा था।
छात्रों और परिवारों के लिए मतलब
अलीगढ़, हाथरस, कासगंज और एटा के छात्रों के लिए इसका सीधा फायदा यह हो सकता है — ऐसे कोर्स जिनमें इंडस्ट्री एक्सपोजर पहले से शामिल हो, बेहतर प्लेसमेंट सपोर्ट, और ऐसी डिग्री जो वास्तव में स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाए, न कि छात्रों को नौकरी के लिए दूसरे शहर जाने पर मजबूर करे। शिक्षा का खर्च प्लान करने वाले अभिभावकों के लिए एजुकेशन लोन ईएमआई कैलकुलेटर फीस और रीपेमेंट का अंदाजा लगाने में मदद कर सकता है, जबकि प्लेसमेंट के बाद सैलरी कैलकुलेटर से टैक्स कटौती के बाद हाथ में आने वाली सैलरी समझी जा सकती है।
मुख्यमंत्री का यह दौरा यहीं नहीं थमा। इसके बाद उन्होंने कलेक्ट्रेट सभागार में लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक की और शाम को नुमाइश मैदान पर 462 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास किया, साथ ही एक विशाल जनसभा को भी संबोधित किया।
अब असली परीक्षा यह होगी कि (RMPSU) इस निर्देश को कितनी तेजी से वास्तविक कोर्स, इंडस्ट्री पार्टनरशिप और प्लेसमेंट नतीजों में बदल पाता है — कुछ ऐसा जिस पर आने वाले महीनों में छात्र और स्थानीय उद्योग दोनों की नजर रहेगी।

