सोने की बढ़ती कीमतों के बीच क्यों बढ़ रहा है पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज का ट्रेंड? बदल रही है भारतीय परिवारों की खरीदारी सोच

June 25, 2026

अवलोकन (Overview)

देश में सोने की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका सीधा असर ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों की आदतों पर दिखाई दे रहा है। अब बड़ी संख्या में लोग नई ज्वेलरी खरीदने के लिए अतिरिक्त नकद खर्च करने के बजाय अपनी पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज करना पसंद कर रहे हैं। उद्योग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि संगठित ज्वेलरी रिटेल कारोबार में एक्सचेंज आधारित खरीदारी का हिस्सा तेजी से बढ़ा है और कई प्रमुख ब्रांडों के लिए यह कुल बिक्री का बड़ा हिस्सा बन चुका है।

Customers exchanging old gold jewellery for new designs at a modern Indian jewellery showroom amid rising gold prices
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भारत में सोने को केवल निवेश नहीं बल्कि परंपरा, सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जाता है। लेकिन जब सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती हैं, तो खरीदारी का तरीका बदलना शुरू हो जाता है। फिलहाल देशभर में यही स्थिति देखने को मिल रही है।

ज्वेलरी उद्योग के अनुसार, सोने की ऊंची कीमतों के कारण बड़ी संख्या में ग्राहक पुरानी ज्वेलरी को एक्सचेंज करके नई डिजाइन वाली ज्वेलरी खरीद रहे हैं। इससे उन्हें पूरी कीमत नकद चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती और खर्च का बोझ भी कम हो जाता है।

एक साल में करीब 60% बढ़े एक्सचेंज ट्रांजैक्शन

हाल के उद्योग आंकड़ों के अनुसार, पुराने सोने के एक्सचेंज से जुड़े लेनदेन में साल-दर-साल लगभग 60% की वृद्धि दर्ज की गई है। कई प्रमुख ज्वेलरी रिटेलर्स का कहना है कि ग्राहक अब पहले की तुलना में अधिक संख्या में अपनी पुरानी ज्वेलरी लेकर स्टोर पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण सोने की लगातार बढ़ती कीमतें हैं। जब नई खरीदारी महंगी हो जाती है, तब पुराने सोने की कीमत भी बढ़ जाती है, जिससे ग्राहकों को एक्सचेंज में बेहतर मूल्य मिल जाता है।

बड़ी ज्वेलरी चेन की बिक्री में बढ़ा एक्सचेंज का हिस्सा

उद्योग रिपोर्टों के मुताबिक, कई संगठित ज्वेलरी कंपनियों में एक्सचेंज आधारित खरीदारी अब कुल बिक्री का 40% से 65% तक हिस्सा बन चुकी है। कुछ कंपनियों ने तो ऐसे दिनों की भी जानकारी दी है जब अधिकांश बिक्री पुराने सोने के एक्सचेंज के जरिए हुई।

यह बदलाव केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी ग्राहक अब नई खरीदारी से पहले घर में रखी पुरानी ज्वेलरी का उपयोग करना पसंद कर रहे हैं।

बदल रही है भारतीय परिवारों की सोच

कुछ साल पहले तक शादी, त्योहार या विशेष अवसरों पर नई ज्वेलरी खरीदना आम बात थी। लेकिन अब परिवार खर्च को लेकर अधिक व्यावहारिक नजर आ रहे हैं।

कई परिवार पुरानी डिजाइन वाली ज्वेलरी को नई डिजाइन में बदलवा रहे हैं। इससे भावनात्मक मूल्य भी बना रहता है और अतिरिक्त खर्च भी कम होता है। खासकर मध्यम वर्ग के परिवारों में यह रुझान तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है।

ऊंची कीमतों ने नई खरीदारी को किया प्रभावित

विश्व स्तर पर भी सोने की ऊंची कीमतों ने ज्वेलरी मांग पर असर डाला है। भारत में कई उपभोक्ता या तो हल्के वजन की ज्वेलरी खरीद रहे हैं या खरीदारी को टाल रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोग एक्सचेंज विकल्प चुन रहे हैं।

विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के अनुसार, भारत में ज्वेलरी खरीदारी के एक बड़े हिस्से में अब किसी न किसी रूप में एक्सचेंज शामिल है।

ग्राहकों के लिए क्या है फायदा?

पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज करने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ग्राहक को नई ज्वेलरी खरीदने के लिए पूरी राशि नकद नहीं देनी पड़ती।

मुख्य फायदे:

  • अतिरिक्त खर्च कम हो जाता है
  • पुरानी डिजाइन को नई डिजाइन में बदला जा सकता है
  • बढ़ी हुई सोने की कीमत का लाभ मिलता है
  • शादी और पारिवारिक जरूरतों के लिए खरीदारी आसान होती है
  • निवेश के रूप में रखा सोना उपयोग में आ जाता है

हालांकि एक्सचेंज से पहले ग्राहकों को शुद्धता जांच, कटौती नियम, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्कों की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। विभिन्न ज्वेलर्स की नीतियां अलग-अलग हो सकती हैं।

क्या आगे भी जारी रह सकता है यह ट्रेंड?

विश्लेषकों का मानना है कि यदि सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो एक्सचेंज आधारित खरीदारी का चलन और मजबूत हो सकता है। इससे घरेलू स्तर पर उपलब्ध सोने का पुनर्चक्रण बढ़ेगा और नई खरीदारी पर दबाव कम होगा।

ज्वेलरी उद्योग भी अब ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष एक्सचेंज योजनाओं और मूल्यांकन सुविधाओं पर अधिक ध्यान दे रहा है।

Conclusion

भारत में सोने की बढ़ती कीमतों ने केवल बाजार नहीं बदला, बल्कि ग्राहकों की सोच भी बदल दी है। नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज करना अब एक व्यावहारिक और किफायती विकल्प बनता जा रहा है। खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यदि सोने के भाव ऊंचे बने रहते हैं, तो आने वाले समय में एक्सचेंज आधारित खरीदारी भारतीय ज्वेलरी बाजार का और बड़ा हिस्सा बन सकती है।

For More Information -

Jewellers say people were already recycling, exchanging old gold instead of new purchases amid PM Modi's appeal - The Economic Times

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Fact-Checked & Verified
लेखक
हर्षित शर्मा

हर्षित शर्मा

सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (SRA)

सटीक और तथ्य-जांच वाले राष्ट्रीय और वैश्विक अपडेट प्रदान करने वाले समाचार शोधकर्ता।

harshitsharma.sra@labhgrow.in
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लक्ष्य भारद्वाज

लक्ष्य भारद्वाज

कंटेंट हेड (HOC)

भारतीय सरकारी योजनाओं और बैंकिंग नीतियों के विशेषज्ञ वित्तीय विश्लेषक।

lakshyabhardwaj.hoc@labhgrow.in

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