SEBI Demat 2.0: टोकनाइज्ड बॉन्ड से निवेश के 5 बड़े फायदे 2026 गाइड

September 12, 2026

अवलोकन (Overview)

भारत में पहली बार ब्लॉकचेन-आधारित डीमैट 2.0 की शुरुआत हुई है, जिसके जरिए कंपनियों ने महज एक सप्ताह में ₹1,025 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई है। सेबी और आरबीआई का यह पायलट प्रोजेक्ट कॉर्पोरेट बॉन्ड को डिजिटल टोकन में बदलकर ई-रुपये से तुरंत सेटलमेंट करता है। यह नई तकनीक भविष्य में बॉन्ड निवेश को शेयरों की तरह सरल और तेज बना देगी, जिससे कागजी कार्यवाही और समय की बड़ी बचत होगी।

SEBI RBI Demat 2.0 launch event tokenised corporate bonds
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भारत के कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में पहली बार ब्लॉकचेन-आधारित सेटलमेंट की शुरुआत हुई है। 10 सितंबर, 2026 को बाजार नियामक सेबी (SEBI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संयुक्त रूप से 'डीमैट 2.0' (Demat 2.0) का पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया। यह सिस्टम कॉर्पोरेट बॉन्ड को डिजिटल टोकन में बदलता है और केंद्रीय बैंक की थोक डिजिटल मुद्रा (e-Rupee) का उपयोग करके उनका सेटलमेंट करता है। लॉन्च के कुछ ही दिनों के भीतर, तीन कंपनियों ने इस नए सिस्टम के जरिए ₹1,000 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई है।

उन निवेशकों के लिए, जो 'डीमैट अकाउंट' को केवल शेयरों के संदर्भ में जानते हैं, यह बॉन्ड जारी करने, रखने और भुगतान करने के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

सेबी डीमैट 2.0 (SEBI Demat 2.0) क्या है?

डीमैट 2.0 कोई नया बॉन्ड नहीं बनाता, बल्कि यह मौजूदा बॉन्ड की प्रक्रिया को डिजिटल बनाता है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत, कॉर्पोरेट बॉन्ड को डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) का उपयोग करके डिपॉजिटरी द्वारा बनाए गए साझा लेजर पर डिजिटल टोकन के रूप में रिकॉर्ड किया जाता है।

बॉन्ड का कानूनी स्वरूप पहले जैसा ही रहता है — वही कूपन दर, मैच्योरिटी, क्रेडिट रेटिंग और निवेशक अधिकार। जो चीज बदलती है, वह है मालिकाना हक रिकॉर्ड करने का तरीका और बॉन्ड जारी होने या भुगतान के समय पैसे का लेन-देन।

यह पायलट प्रोजेक्ट सेबी के 'रेगुलेटरी सैंडबॉक्स' के तहत चलाया जा रहा है, जिसका अर्थ है कि यह एक नियंत्रित परीक्षण है। भविष्य के व्यापक नियम इस परीक्षण की सफलता पर निर्भर करेंगे।

पहले सप्ताह में ₹1,025 करोड़ जुटाए गए

अब तक के आंकड़े पायलट प्रोजेक्ट के दायरे को दर्शाते हैं:

  • REC लिमिटेड ने 7 सितंबर को पहला टोकनाइज्ड बॉन्ड जारी किया, जिससे 18 संस्थागत निवेशकों से ₹500 करोड़ जुटाए गए।
  • L&T ने 9 सितंबर को चार निवेशकों से ₹500 करोड़ जुटाए।
  • IIFL ने उसी दिन एक निवेशक से ₹25 करोड़ जुटाए।

यह डीमैट 2.0 के तहत एक सप्ताह से भी कम समय में कुल ₹1,025 करोड़ का इश्यू है, जो उम्मीदों से काफी बेहतर शुरुआत है।

त्वरित तथ्य: सामान्यतः लगने वाले दो से तीन कार्य दिवसों के बजाय, डीमैट 2.0 के तहत जारीकर्ता उसी दिन फंड प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि बॉन्ड और भुगतान अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ सेटल होते हैं।

ई-रुपया सेटलमेंट कैसे काम करता है?

डीमैट 2.0 का सेटलमेंट आरबीआई की थोक डिजिटल मुद्रा (e₹-W) का उपयोग करता है। यह आरबीआई के 'यूनिफाइड मार्केट इंटरफेस' के माध्यम से डिपॉजिटरी से जुड़ता है।

पारंपरिक बॉन्ड इश्यू में, बॉन्ड का हस्तांतरण और नकद भुगतान दो अलग-अलग चरण होते हैं, जहाँ सेटलमेंट का जोखिम रहता है। डीमैट 2.0 इन दोनों को एक साथ जोड़ता है, जिसे 'एटॉमिक सेटलमेंट' (atomic settlement) कहा जाता है।

बॉन्डधारकों का रिकॉर्ड रियल-टाइम में साझा लेजर पर दिखता है, और ब्याज का भुगतान सीधे निवेशक के डिजिटल वॉलेट में आता है।

निवेशक अभी डीमैट 2.0 का उपयोग कैसे कर रहे हैं?

फिलहाल, इसमें केवल संस्थागत निवेशक शामिल हो सकते हैं, लेकिन भविष्य में खुदरा (रिटेल) पहुंच की उम्मीद है:

1. पात्र संस्थागत निवेशक अपनी डिपॉजिटरी (NSDL या CDSL) के साथ टोकनाइज्ड बॉन्ड सुविधा सक्रिय करते हैं।

2. निवेशक के पास एक सहभागी बैंक के साथ थोक डिजिटल रुपया वॉलेट होना आवश्यक है।

3. मौजूदा बोली प्रक्रिया (bidding process) के माध्यम से टोकनाइज्ड बॉन्ड के लिए बोली लगाई जाती है।

4. आवंटन के बाद, बॉन्ड टोकन और ई-रुपया भुगतान एक साथ सेटल हो जाते हैं।

5. इसके बाद टोकनाइज्ड बॉन्ड निवेशक के नियमित डीमैट खाते में दिखाई देता है।

आम निवेशकों के लिए इसके मायने

फिलहाल, डीमैट 2.0 केवल एक संस्थागत पायलट है, इसलिए खुदरा निवेशक अभी इन्हें नहीं खरीद सकते।

सेबी ने कहा है कि पायलट का विस्तार चरणों में किया जाएगा। यदि यह सफल होता है, तो कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदना शेयरों की तरह सरल हो सकता है, जिसमें सेटलमेंट तेज होगा और ब्याज भुगतान में कम कागजी कार्यवाही होगी।

जब तक खुदरा पहुंच नहीं खुलती, निवेशक पारंपरिक फिक्स्ड-इनकम विकल्पों की तुलना करने के लिए हमारे FD कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं ताकि यह देख सकें कि बॉन्ड यील्ड के मुकाबले फिक्स्ड डिपॉजिट कैसा प्रदर्शन कर रहा है।

आगे क्या होगा?

सेबी ने संकेत दिया है कि इस चरण के तहत और भी प्राथमिक इश्यू जारी किए जाएंगे। अगले चरणों में सेकेंडरी मार्केट ट्रेडिंग और रिटेल निवेशकों के लिए इसे खोलने की योजना है, हालांकि इसके लिए अभी कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं है।

बाजार के विशेषज्ञों ने स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए ब्याज भुगतान और रिडेम्पशन को स्वचालित बनाने की बात कही है, जो भविष्य का एक बड़ा लक्ष्य है।

मुख्य बिंदु

  • डीमैट 2.0 एक सेबी-आरबीआई पायलट है जो डीएलटी (DLT) का उपयोग करके बॉन्ड को टोकनाइज करता है।
  • REC, L&T और IIFL द्वारा अब तक ₹1,025 करोड़ जुटाए जा चुके हैं।
  • सेटलमेंट के लिए आरबीआई की थोक डिजिटल मुद्रा का उपयोग होता है, जिससे उसी दिन ट्रांसफर संभव है।
  • बॉन्ड की कानूनी शर्तें (रेटिंग, कूपन, मैच्योरिटी) जस की तस हैं।
  • खुदरा निवेशकों के लिए एक्सेस भविष्य का चरण है, अभी उपलब्ध नहीं है।

निष्कर्ष:

डीमैट 2.0 अभी अपने शुरुआती चरण में है। हालांकि वर्तमान में यह केवल संस्थागत स्तर पर है, लेकिन शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि सेबी और आरबीआई तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यदि यह पायलट सफल होता है, तो यह भारत के ₹50 लाख करोड़ के कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

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लेखक (Written By)
लक्ष्य भारद्वाज

लक्ष्य भारद्वाज

कंटेंट हेड एवं मुख्य लेखक

भारतीय सरकारी योजनाओं, बाजार भाव और बैंकिंग नीतियों के विशेषज्ञ वरिष्ठ वित्तीय एवं समाचार लेखक।

lakshyabhardwaj.hoc@labhgrow.in
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हर्षित शर्मा

हर्षित शर्मा

सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (तथ्य परीक्षक)

सरकारी और वित्तीय डेटा स्रोतों से 100% प्रामाणिकता और तथ्यों की पुष्टि करने वाले समर्पित शोधकर्ता व विश्लेषक।

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