आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा: आपकी होम लोन ईएमआई पर इसका असर
अवलोकन (Overview)
आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखते हुए आम आदमी को बड़ी राहत दी है। मौद्रिक नीति समिति ने महंगाई के दबाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ‘तटस्थ’ रुख अपनाया है। इस फैसले से आपकी होम लोन EMI में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। साथ ही, आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। हालांकि, महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक सतर्क है। होम लोन लेने वालों के लिए यह स्थिरता का समय है, लेकिन बेहतर विकल्प चुनने के लिए रिफाइनेंसिंग के अवसरों पर नजर जरूर रखें।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है। महंगाई के दबाव को देखते हुए यह फैसला होम लोन लेने वालों के लिए एक राहत की खबर है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार, 5 अगस्त, 2026 को तीन दिवसीय बैठक के बाद यह घोषणा की।
समिति के सभी छह सदस्यों ने सर्वसम्मति से दरों को स्थिर रखने और 'तटस्थ' (neutral) रुख बनाए रखने का निर्णय लिया है। आरबीआई ने दिसंबर 2025 में आखिरी बार रेपो रेट में बदलाव किया था, तब से बैंक इसी नीति का पालन कर रहा है।
जो लोग अपनी होम लोन ईएमआई (EMI) ट्रैक कर रहे हैं, उनके लिए यह सबसे महत्वपूर्ण खबर है। चूंकि बैंकों के फ्लोटिंग-रेट लोन सीधे रेपो रेट से जुड़े होते हैं, इसलिए दरें स्थिर रहने का मतलब है कि फिलहाल आपकी मौजूदा ईएमआई में कोई बदलाव नहीं होगा।
आरबीआई ने दरें स्थिर क्यों रखीं?
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि समिति का रुख न तो नरम है और न ही सख्त, और भविष्य के फैसले महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेंगे। इस फैसले के पीछे भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और खाद्य व ईंधन की बढ़ती कीमतों का मुख्य हाथ है।
आरबीआई का अनुमान है कि महंगाई वित्त वर्ष 27 की तीसरी तिमाही में चरम पर होगी। हालांकि, पूरे साल के लिए सीपीआई (CPI) मुद्रास्फीति के अनुमान को जून के 5.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। तिमाही आधार पर, आरबीआई ने Q1 में 5.3%, Q2 में 4.7%, Q3 में 5.9% और Q4 में 5.5% महंगाई का अनुमान लगाया है।
आर्थिक विकास (GDP) के मोर्चे पर स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है। एमपीसी ने वित्त वर्ष 27 के लिए वास्तविक जीडीपी विकास दर के अनुमान को 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जिसका श्रेय घरेलू मांग को जाता है।
आपकी ईएमआई पर इसका क्या असर होगा?
मौजूदा होम लोन धारकों के लिए इसका मतलब है कि अगली बैठक तक आपकी ईएमआई नहीं बढ़ेगी। आरबीआई की अगली बैठक 5-7 अक्टूबर 2026 को होनी है, जिसमें दरों पर फिर से विचार किया जाएगा।
जो लोग फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट के बीच चुनाव कर रहे हैं, उनके लिए यह स्थिरता का समय है, लेकिन भविष्य में महंगाई और ग्रोथ के आंकड़ों के हिसाब से दरों में बदलाव हो सकता है। फिक्स्ड रेट सुरक्षित विकल्प लगता है लेकिन इसमें शुरुआती दरें अधिक हो सकती हैं। हमेशा लोन की पूरी अवधि की कुल लागत (Total Cost) की तुलना करके ही निर्णय लें।
यदि आपने ऊंचे ब्याज दर पर लोन लिया था, तो यह रिफाइनेंसिंग (Refinancing) के बारे में सोचने का सही समय है। बैंक समय-समय पर अपने रिस्क प्रीमियम में बदलाव करते हैं, जिससे मौजूदा दरें कम हो सकती हैं। आप LabhGrow होम लोन ईएमआई कैलकुलेटर का उपयोग करके अपनी बचत का आकलन कर सकते हैं।
होम लोन के अलावा अन्य असर
व्यावसायिक लोन और एमएसएमई (MSME) के लिए उधार लेने की लागत फिलहाल स्थिर रहेगी। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों को अभी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए क्योंकि बैंकों की फंड लागत में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
गोल्ड लोन और पर्सनल लोन पर इसका असर कम होता है क्योंकि इनकी दरें बेंचमार्क से अलग अपने रिस्क स्प्रेड्स पर तय होती हैं।
आगे क्या देखें?
आरबीआई का रुख यह स्पष्ट करता है कि नीतियां डेटा पर आधारित रहेंगी। उधारकर्ताओं को अक्टूबर की अगली एमपीसी बैठक और मासिक महंगाई आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
निष्कर्ष
फिलहाल, रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने का आरबीआई का फैसला मौजूदा उधारकर्ताओं के लिए स्थिरता लाता है। आरबीआई का सतर्क रुख यह संकेत देता है कि तत्काल दर में कटौती की संभावना कम है। पुराने महंगे लोन वाले लोगों को अपने विकल्पों की समीक्षा कर लेनी चाहिए।
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कंटेंट हेड एवं मुख्य लेखक
भारतीय सरकारी योजनाओं, बाजार भाव और बैंकिंग नीतियों के विशेषज्ञ वरिष्ठ वित्तीय एवं समाचार लेखक।
lakshyabhardwaj.hoc@labhgrow.in
सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (तथ्य परीक्षक)
सरकारी और वित्तीय डेटा स्रोतों से 100% प्रामाणिकता और तथ्यों की पुष्टि करने वाले समर्पित शोधकर्ता व विश्लेषक।
harshitsharma.sra@labhgrow.in