BP, एलर्जी और एंटीबायोटिक लेने वालों को बड़ी राहत, 39 दवाओं की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण

July 10, 2026

अवलोकन (Overview)

केंद्र सरकार ने नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के माध्यम से 39 नई दवा फॉर्मुलेशन की रिटेल कीमतें निर्धारित की हैं। इस सूची में संक्रमण (इन्फेक्शन), एलर्जी और हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं। इस फैसले का उद्देश्य आवश्यक दवाओं को आम लोगों के लिए अधिक किफायती बनाना और उनकी कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी को रोकना है।

NPPA notification announcing retail price control for 39 medicines including blood pressure, allergy and antibiotic drugs.
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ब्लड प्रेशर, एलर्जी या बैक्टीरियल संक्रमण की दवाएं खरीदने वाले मरीजों के लिए राहत की खबर है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने Drugs (Prices Control) Order (DPCO), 2013 के तहत 39 नई दवा फॉर्मुलेशन की रिटेल कीमतें तय कर दी हैं। इस फैसले का मकसद आवश्यक दवाओं को अधिक किफायती बनाना और देशभर में मरीजों को उचित कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराना है।

सरकार समय-समय पर आवश्यक दवाओं की कीमतों की समीक्षा करती है ताकि आम लोगों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम हो और दवाओं की उपलब्धता भी बनी रहे।

NPPA ने क्या फैसला लिया?

NPPA ने DPCO, 2013 के प्रावधानों के तहत 39 नई दवा फॉर्मुलेशन की अधिकतम रिटेल कीमत तय की है। जिन दवा कंपनियों द्वारा इन फॉर्मुलेशन का निर्माण और बिक्री की जाएगी, उन्हें निर्धारित कीमत या उससे कम कीमत पर ही दवाएं बेचनी होंगी। लागू कर (Tax) नियमों के अनुसार अलग से लिया जा सकता है।

यह निर्णय उन नई दवा फॉर्मुलेशन पर लागू होगा जो मूल्य नियंत्रण के दायरे में आती हैं।

किन दवाओं को किया गया शामिल?

नई सूची में कई ऐसी दवाएं शामिल हैं जिनका उपयोग रोजमर्रा के इलाज में किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • बैक्टीरियल संक्रमण (Infections) की दवाएं
  • एलर्जी की दवाएं
  • हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) की दवाएं

इनमें प्रमुख फॉर्मुलेशन हैं—

  • Amoxicillin + Clavulanate (एंटीबायोटिक)
  • Cetirizine (एलर्जी की दवा)
  • हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कुछ कॉम्बिनेशन ड्रग्स

ध्यान देने वाली बात यह है कि मूल्य नियंत्रण किसी विशेष ब्रांड पर नहीं बल्कि दवा के फॉर्मुलेशन पर लागू होता है।

सरकार दवाओं की कीमत क्यों नियंत्रित करती है?

भारत में इलाज का एक बड़ा हिस्सा दवाओं पर होने वाले खर्च से जुड़ा होता है। कई मरीजों को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य बीमारियों के लिए लंबे समय तक नियमित दवाएं लेनी पड़ती हैं। ऐसे में दवाओं की कीमत बढ़ने से आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) आवश्यक दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है। यह कार्य Drugs (Prices Control) Order (DPCO), 2013 के तहत किया जाता है ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं उचित कीमत पर उपलब्ध हो सकें।

मरीजों पर क्या होगा असर?

नई कीमतें तय होने के बाद इन दवाओं का उपयोग करने वाले मरीजों को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।

  • आवश्यक दवाएं अधिक किफायती दर पर उपलब्ध हो सकती हैं।

  • अलग-अलग मेडिकल स्टोर पर कीमतों में अनावश्यक अंतर कम हो सकता है।

  • लंबे समय तक दवा लेने वाले मरीजों का इलाज का खर्च घट सकता है।

  • दवाओं की कीमतों में अधिक पारदर्शिता आएगी।

हालांकि, वास्तविक लाभ तब मिलेगा जब दवा निर्माता और मेडिकल स्टोर नई निर्धारित कीमतों के अनुसार दवाओं की बिक्री शुरू करेंगे।

दवा खरीदते समय यह चेकलिस्ट जरूर अपनाएं

यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इन दवाओं का उपयोग करता है, तो खरीदारी के समय इन बातों का ध्यान रखें—

जांच करेंक्यों जरूरी है?
दवा का फॉर्मुलेशन देखेंमूल्य नियंत्रण फॉर्मुलेशन पर लागू होता है, केवल ब्रांड पर नहीं।
दवा की MRP जांचेंसुनिश्चित करें कि कीमत निर्धारित सीमा के अनुरूप हो।
हमेशा बिल लेंकिसी विवाद की स्थिति में यह उपयोगी रहेगा।
डॉक्टर से जेनेरिक विकल्प के बारे में पूछेंकई बार समान प्रभाव वाली दवा कम कीमत में उपलब्ध होती है।

राज्यवार फार्मेसी में कैसे करें कीमत की जांच?

हर राज्य में अलग-अलग कंपनियों की दवाएं उपलब्ध हो सकती हैं। ऐसे में मरीजों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए—

  • दवा के स्ट्रिप पर लिखे Composition (फॉर्मुलेशन) को देखें।
  • MRP की तुलना करें।
  • डॉक्टर की सलाह से आवश्यकता होने पर जेनेरिक दवा के बारे में जानकारी लें।
  • यदि निर्धारित कीमत से अधिक वसूली की आशंका हो, तो संबंधित राज्य औषधि नियंत्रण विभाग (State Drug Controller) या उपभोक्ता शिकायत मंच पर शिकायत कर सकते हैं।

NPPA कैसे तय करता है दवाओं की कीमत?

NPPA, Department of Pharmaceuticals के अंतर्गत कार्य करने वाली संस्था है। यह आवश्यक दवाओं की कीमतों पर निगरानी रखती है और DPCO, 2013 के नियमों के अनुसार नई दवा फॉर्मुलेशन की अधिकतम रिटेल कीमत निर्धारित करती है।

समय-समय पर नई दवाओं, संशोधित फॉर्मुलेशन और अन्य आवश्यक दवाओं के लिए भी नई कीमतों की अधिसूचना जारी की जाती है ताकि मरीजों को उचित दर पर दवाएं उपलब्ध होती रहें।

निष्कर्ष

NPPA द्वारा 39 नई दवा फॉर्मुलेशन की रिटेल कीमतें तय किया जाना आम मरीजों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। इस सूची में संक्रमण, एलर्जी और हाई ब्लड प्रेशर जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं। इससे मरीजों को उचित कीमत पर दवाएं मिलने की उम्मीद है और दवा बाजार में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

हालांकि, मरीजों को दवा खरीदते समय दवा का फॉर्मुलेशन, MRP और बिल अवश्य जांचना चाहिए। यदि किसी मेडिकल स्टोर पर निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूली जाती है, तो संबंधित राज्य औषधि नियंत्रण विभाग या उपभोक्ता शिकायत मंच पर शिकायत की जा सकती है।

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Fact-Checked & Verified
लेखक
हर्षित शर्मा

हर्षित शर्मा

सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (SRA)

सटीक और तथ्य-जांच वाले राष्ट्रीय और वैश्विक अपडेट प्रदान करने वाले समाचार शोधकर्ता।

harshitsharma.sra@labhgrow.in
सत्यापित
लक्ष्य भारद्वाज

लक्ष्य भारद्वाज

कंटेंट हेड (HOC)

भारतीय सरकारी योजनाओं और बैंकिंग नीतियों के विशेषज्ञ वित्तीय विश्लेषक।

lakshyabhardwaj.hoc@labhgrow.in

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    NPPA Fixes Retail Prices of 39 Medicines: BP, Allergy and Antibiotic Drugs Come Under Price Control