प्रति एकड़ ₹15,000: धान की खेती छोड़ने वाले छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए नई प्रोत्साहन राशि
अवलोकन (Overview)
छत्तीसगढ़ के किसान अब धान के बजाय दलहन, तिलहन या मक्का की खेती करके प्रति एकड़ ₹15,000 तक कमा सकते हैं। समय सीमा समाप्त होने से पहले आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया यहाँ जानें।

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए खरीफ सीजन की फसल योजना पर फिर से विचार करने का एक शानदार मौका है। राज्य सरकार ने अपनी प्रमुख 'कृषक उन्नति योजना' के तहत प्रोत्साहन राशि को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति एकड़ कर दिया है। यह लाभ उन किसानों को मिलेगा जो धान की पारंपरिक खेती छोड़कर दलहन, तिलहन, मक्का, कपास या मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती अपनाएंगे।
राज्य कृषि विभाग की आधिकारिक अधिसूचना के बाद, यह निर्णय खरीफ 2026 सीजन से लागू हो गया है। छत्तीसगढ़ में जहां लंबे समय से धान की खेती का बोलबाला रहा है, वहीं यह कदम फसल विविधीकरण (crop diversification) की दिशा में एक बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन माना जा रहा है।
आखिर क्या बदलाव हुए हैं?
अब तक, जो किसान धान के बजाय अरहर, मूंग, सोयाबीन, सरसों, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी या कपास जैसी वैकल्पिक फसलों को चुनते थे, उन्हें ₹10,000 प्रति एकड़ की इनपुट सहायता मिलती थी। संशोधित कृषक उन्नति योजना के तहत अब इस राशि को 50 प्रतिशत बढ़ाकर ₹15,000 प्रति एकड़ कर दिया गया है।
बढ़ी हुई राशि के साथ ही, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस योजना के तहत उगाई गई दलहन और तिलहन फसलों की खरीद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की पीएम-आशा (PM-AASHA) योजना के जरिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी। इससे किसानों को दोहरी वित्तीय सुरक्षा मिलती है — फसल बदलने पर प्रोत्साहन राशि और उपज की बिक्री पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी।
मुख्य बिंदु (Quick Highlights)
प्रोत्साहन राशि ₹10,000 से बढ़कर ₹15,000 प्रति एकड़ हुई
यह लाभ धान के बजाय दलहन, तिलहन, मक्का, कपास और मोटे अनाज उगाने पर मिलेगा
पीएम-आशा योजना के तहत MSP पर खरीद की गारंटी
एग्रीस्टैक (Agristack) + एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य
खरीफ 2026 पंजीकरण/संशोधन की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026
डिजिटल क्रॉप सर्वे के सत्यापन के बाद DBT के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भुगतान
सरकार का यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?
छत्तीसगढ़ कृषि विभाग ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि एक ही फसल पर निर्भरता मिट्टी के स्वास्थ्य और किसानों की आय, दोनों के लिए जोखिम भरी है। बार-बार धान की खेती करने से भूजल स्तर घटता है और मिट्टी के पोषक तत्व कम होते हैं, साथ ही धान की कीमतों या खरीद प्रक्रिया में उतार-चढ़ाव होने पर किसान जोखिम में पड़ जाते हैं।
दलहन और तिलहन की खेती को अधिक लाभकारी बनाकर, राज्य सरकार किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित कर रही है जिनमें पानी कम लगता है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और MSP के जरिए आय भी सुरक्षित रहती है।
₹15,000 प्रति एकड़ का लाभ कौन उठा सकता है?
कृषक उन्नति योजना के तहत इस प्रोत्साहन का लाभ पाने के लिए किसान को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा:
- लैंड रिकॉर्ड्स (भू-अभिलेख) में किसान उस जमीन का असली काश्तकार होना चाहिए।
- किसान को खरीफ 2026 के दौरान अपने खेत में धान के स्थान पर पात्र वैकल्पिक फसल (दलहन, तिलहन, मक्का, कपास, या मोटे अनाज) की बुवाई करनी होगी।
- एग्रीस्टैक के तहत 'एकीकृत किसान पोर्टल' (Ekikrit Kisan Portal) पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के लिए बैंक खाता आधार से लिंक और सत्यापित होना चाहिए।
- भुगतान जारी करने से पहले डिजिटल फसल सर्वेक्षण (digital crop survey) के माध्यम से वास्तविक बुवाई की जांच की जाएगी।
कैसे करें 'एकीकृत किसान पोर्टल' पर पंजीकरण
यह वह महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस लाभ के पात्र होने के लिए प्रत्येक किसान को समय रहते पंजीकरण पूरा करना होगा।
1. आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: छत्तीसगढ़ एकीकृत किसान पोर्टल kisan.cg.nic.in पर जाएं या अपने स्थानीय कृषि विभाग कार्यालय से जानकारी लें।
2. लॉगिन करें या प्रोफाइल बनाएं: अपने आधार नंबर और मोबाइल नंबर का उपयोग करें। यदि आप पहले से पीएम-किसान या किसी पिछले सीजन में पंजीकृत हैं, तो जांच लें कि क्या आपकी प्रोफाइल में केवल अपडेट करने की आवश्यकता है।
3. भूमि और फसल का विवरण अपडेट करें: उस जमीन का खसरा/प्लॉट विवरण दर्ज करें जहां आप वैकल्पिक फसल उगा रहे हैं और सही फसल का चयन करें।
4. बैंक खाता लिंक और सत्यापित करें: भुगतान सीधे DBT के माध्यम से आता है, इसलिए सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता आधार से लिंक हो। विवरण में कोई भी गलती (mismatch) भुगतान में देरी का मुख्य कारण बनती है।
5. 31 अक्टूबर 2026 से पहले आवेदन करें: यह नए पंजीकरण और पुराने विवरणों में संशोधन की अंतिम तिथि है। इसके बाद किए गए आवेदन इस सीजन के प्रोत्साहन के लिए मान्य नहीं होंगे।
6. पंजीकरण संख्या (Acknowledgment Number) सुरक्षित रखें: सबमिशन के बाद मिले पुष्टिकरण संदेश को संभाल कर रखें, भविष्य में किसी भी सत्यापन त्रुटि के समय यह आपके काम आएगा।
7. डिजिटल फसल सर्वेक्षण में सहयोग करें: अधिकारी आपके खेत में जाकर फसल की जांच करेंगे। पोर्टल पर दी गई जानकारी और खेत में लगी फसल में अंतर होने पर पात्रता प्रभावित हो सकती है।
पंजीकरण के बाद आगे क्या होगा?
एक बार पंजीकरण पूरा होने और डिजिटल फसल सर्वेक्षण में पुष्टि होने के बाद, ₹15,000 प्रति एकड़ की राशि सीधे आपके बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेज दी जाएगी। इस प्रक्रिया में बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं है, जिससे भ्रष्टाचार और देरी की संभावना कम हो जाती है।
विशेष रूप से दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों के लिए, उपज तैयार होने पर उसे खुले बाजार के बजाय पीएम-आशा योजना के तहत MSP पर बेचने का विकल्प भी उपलब्ध है।
छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक बड़ी तस्वीर
छत्तीसगढ़ के कई छोटे किसानों के लिए धान एक सुरक्षित और परिचित विकल्प रहा है। हालांकि, यह संशोधित प्रोत्साहन उन वैकल्पिक फसलों को अधिक आकर्षक बनाता है, साथ ही साथ एक निश्चित मूल्य खरीद (buyback) की गारंटी भी देता है।
जिन क्षेत्रों में धान की पैदावार स्थिर हो गई है या जल संसाधनों की कमी हो रही है, वहां के किसान अब पूरे भरोसे के साथ दलहन, तिलहन या मिलेट्स की खेती की ओर रुख कर सकते हैं।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर ₹15,000 करना फसल विविधीकरण की दिशा में एक साहसिक और स्वागतयोग्य कदम है। हालांकि, इस योजना का लाभ उठाने के लिए समय रहते पोर्टल पर पंजीकरण करना, सही विवरण देना और सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करना अनिवार्य है। चूक होने पर किसान इस सीजन में सरकारी प्रोत्साहन से वंचित रह सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए यहां देखें -
https://kisansamadhan.com/paddy-alternative-crops-15000-per-acre-assistance-chhattisgarh-2026/
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कंटेंट हेड एवं मुख्य लेखक
भारतीय सरकारी योजनाओं, बाजार भाव और बैंकिंग नीतियों के विशेषज्ञ वरिष्ठ वित्तीय एवं समाचार लेखक।
lakshyabhardwaj.hoc@labhgrow.in
सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (तथ्य परीक्षक)
सरकारी और वित्तीय डेटा स्रोतों से 100% प्रामाणिकता और तथ्यों की पुष्टि करने वाले समर्पित शोधकर्ता व विश्लेषक।
harshitsharma.sra@labhgrow.in