यूपी की महिला दुग्ध उत्पादकों को गाय खरीदने पर मिलेगी 80,000 रुपये की सब्सिडी

July 24, 2026

अवलोकन (Overview)

उत्तर प्रदेश की स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के तहत महिला डेयरी किसानों को गिर और साहीवाल जैसी दो देसी गायों की खरीद पर 40% यानी ₹80,000 तक की सब्सिडी दी जा रही है। जानिए इसके लिए आवेदन कैसे करें।

Woman dairy farmer standing with Gir cows under Uttar Pradesh government livestock scheme
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उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाली हजारों महिलाओं के लिए, एक अच्छी दुधारू गाय का मालिक होना सिर्फ गुजारा करने और एक छोटा, स्थिर बिजनेस शुरू करने के बीच का बड़ा अंतर हो सकता है। राज्य सरकार की 'मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना' इस दिशा में एक बड़ा कदम है। इस योजना के तहत, उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्ल की गायों के साथ दो-पशु डेयरी यूनिट लगाने के लिए ₹80,000 तक की सब्सिडी दी जा रही है।

यह योजना राज्य के 'नंद बाबा दुग्ध मिशन' का हिस्सा है, जो योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है। अधिकारियों ने इसे "ऑपरेशन-4" का नाम दिया है, जिसमें दो से लेकर पच्चीस गायों तक की विभिन्न डेयरी इकाइयों के लिए चार अलग-अलग योजनाएं शामिल हैं। 'स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना' इस नेटवर्क की एंट्री-लेवल स्कीम है, जिसे विशेष रूप से छोटे और नए डेयरी उद्यमियों के लिए तैयार किया गया है।

सब्सिडी कैसे काम करती है

इस योजना के तहत, सरकार दो गायों की यूनिट स्थापित करने की लागत का 40% (अधिकतम ₹80,000 तक) वहन करती है। एक यूनिट की कुल लागत आमतौर पर लगभग ₹2 लाख के आसपास आती है, जिसका मतलब है कि शेष राशि का प्रबंध किसान को करना होता है, जिसे वे अक्सर अपनी बचत या छोटे बैंक लोन के माध्यम से पूरा करते हैं।

सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) के जरिए भेजी जाती है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी रहती है और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है। किसानों को ध्यान देना चाहिए कि यह राशि एक बार में नहीं, बल्कि कान में टैगिंग (ear-tagging) और पशुओं के बीमा जैसे अनिवार्य चरणों को पूरा करने के बाद किस्तों में जारी की जाती है।

कौन सी गाय की नस्लें पात्र हैं

सभी गायें इस सब्सिडी के लिए पात्र नहीं हैं। यह योजना स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है, जिसमें निम्नलिखित नस्लें शामिल हैं:

  • गिर (Gir)
  • साहीवाल (Sahiwal)
  • हरियाणा (Haryana)
  • थारपारकर (Tharparkar)

किसानों को इन नस्लों को अच्छी गुणवत्ता वाले स्रोतों से खरीदना होता है। इस योजना के तहत केवल स्वदेशी नस्ल के पशु ही पाले जा सकते हैं; जर्सी या क्रॉस-ब्रीड गायें इस योजना का हिस्सा नहीं हैं।

महिलाओं के लिए आरक्षण

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है। स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के तहत 50% सीटें महिला आवेदकों के लिए आरक्षित हैं। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण महिलाओं को डेयरी उद्यमिता से जोड़ना है। इसके अलावा, ग्रामीण युवाओं और नए उद्यमियों को भी प्राथमिकता दी जाती है जिन्होंने पहले किसी अन्य डेयरी योजना का लाभ नहीं उठाया है।

ई-लॉटरी के जरिए चयन

चूंकि इस तरह की सब्सिडी की मांग हमेशा अधिक होती है, इसलिए चयन 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर नहीं होता है। जिला स्तरीय पशुपालन समितियां आवेदनों का सत्यापन करती हैं। यदि पात्र आवेदकों की संख्या निर्धारित लक्ष्य से अधिक हो जाती है, तो ई-लॉटरी के माध्यम से लाभार्थियों को चुना जाता है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे और पक्षपात की गुंजाइश न रहे।

आवेदन के लिए योग्यता

इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक को निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है:

  • उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
  • पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त जगह या शेड होना चाहिए।
  • आवेदक के पास पहले से दो से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी गायें नहीं होनी चाहिए।
  • कामधेनु या मिनी कामधेनु जैसी समान योजनाओं का पहले लाभ न लिया हो।

इच्छुक किसान 'नंद बाबा दुग्ध मिशन' के आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं या अपने जिले के पशुपालन विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं, क्योंकि आवेदन की समय सीमा और अन्य शर्तें विभाग द्वारा समय-समय पर जारी की जाती हैं।

आवश्यक दस्तावेज

यद्यपि आवश्यकताएं जिले के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती हैं, आवेदकों को आमतौर पर निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखने चाहिए:

  • आधार कार्ड या वैध पहचान पत्र
  • बैंक पासबुक की कॉपी (DBT के लिए)
  • भूमि स्वामित्व या पट्टे के दस्तावेज (पशुओं के लिए पर्याप्त जगह का प्रमाण)
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ

ग्रामीण उत्तर प्रदेश के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है

एक ऐसे राज्य में जहां डेयरी पालन लाखों परिवारों का आधार है, छोटे और नए किसानों के लिए यह सब्सिडी एक क्रांतिकारी कदम है। यह योजना न केवल बड़े ऑपरेटरों को सपोर्ट करती है, बल्कि महिलाओं को भी समान अवसर प्रदान करती है। दो गायों की एक छोटी यूनिट एक महिला को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपना खुद का उद्यम शुरू करने के लिए एक शानदार शुरुआत दे सकती है।

जो किसान अपनी यूनिट की लागत के लिए बैंक लोन लेना चाहते हैं, वे LabhGrow के EMI कैलकुलेटर: होम, कार और पर्सनल लोन EMI कैलकुलेट करें का उपयोग करके अपने मासिक भुगतान की योजना बना सकते हैं।

निष्कर्ष:

मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना महिलाओं और छोटे किसानों को डेयरी उद्योग में लाने का एक लक्षित प्रयास है। इसकी सफलता जिला स्तर पर होने वाले सत्यापन और DBT वितरण पर निर्भर करेगी। इसलिए, आवेदकों को स्थानीय पशुपालन विभाग के संपर्क में रहना चाहिए ताकि उन्हें सभी अपडेट्स समय पर मिलते रहें।

अधिक जानकारी के लिए -

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना | गवर्नमेंट स्कीम्स इंडिया

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Expert Verified
लेखक
लक्ष्य भारद्वाज

लक्ष्य भारद्वाज

कंटेंट हेड (HOC)

भारतीय सरकारी योजनाओं और बैंकिंग नीतियों के विशेषज्ञ वित्तीय विश्लेषक।

lakshyabhardwaj.hoc@labhgrow.in

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न