सौभाग्य योजना: ग्रामीण घरों के लिए मुफ्त बिजली

July 20, 2026

अवलोकन (Overview)

सौभाग्य योजना ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए। जानिए इस योजना की पात्रता, लाभ, वर्तमान स्थिति और अब इसकी जगह किस योजना ने ले ली है।

Rural family receiving a free electricity connection under Saubhagya Scheme
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लाखों ग्रामीण भारतीय परिवारों के लिए सूर्यास्त के बाद घर में बिजली का बल्ब जलना कभी एक दूर का सपना हुआ करता था। इस कमी को दूर करने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना', जिसे 'सौभाग्य' योजना के नाम से जाना जाता है, की शुरुआत की। 25 सितंबर, 2017 को शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के हर इच्छुक घर तक मुफ्त बिजली कनेक्शन पहुंचाना था, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची थी।

लगभग नौ वर्षों के बाद, यह योजना अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त कर अब आधिकारिक रूप से बंद हो चुकी है। आइए जानते हैं कि सौभाग्य योजना ने क्या हासिल किया, इससे किसे लाभ मिला और जिन ग्रामीण परिवारों के पास अभी भी कनेक्शन नहीं है, उन्हें आज क्या करना चाहिए।

सौभाग्य योजना (Saubhagya Scheme) क्या थी?

सौभाग्य योजना को भारत के विद्युतीकरण (Electrification) को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। इससे पहले, 'दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना' (DDUGJY) ने पूरे गांवों को बिजली पहुंचाने का काम किया था। सौभाग्य योजना ने उसी काम को आगे बढ़ाया और उन घरों पर ध्यान केंद्रित किया, जो गांवों के विद्युतीकरण के बावजूद छूट गए थे, चाहे वे ग्रामीण क्षेत्र हों या शहरी।

रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) को इस योजना के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया था और राज्यों व जिलों में प्रगति को ट्रैक करने के लिए saubhagya.gov.in नाम से एक समर्पित पोर्टल लॉन्च किया गया था।

योजना का मुख्य उद्देश्य (Objective of the Scheme)

इसका मुख्य लक्ष्य सार्वभौमिक घरेलू विद्युतीकरण था। व्यवहार में इसका मतलब था:

  • ग्रामीण भारत के हर उस घर तक बिजली पहुंचाना, जहां कनेक्शन नहीं था, चाहे उनकी आय का स्तर कुछ भी हो।
  • शहरी क्षेत्रों के सभी इच्छुक गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन देना।
  • मुफ्त कनेक्शन और गैर-गरीब परिवारों के लिए किस्तों (Installment) पर कम लागत वाले कनेक्शन की सुविधा।

शुरुआत में इसकी समय सीमा दिसंबर 2018 थी, जिसे बाद में 31 मार्च, 2019 तक बढ़ा दिया गया था।

पात्रता (Who Was Eligible)

सौभाग्य योजना के तहत पात्रता 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC 2011) पर आधारित थी:

  • SECC 2011 डेटा के अनुसार गरीब परिवारों को पूरी तरह से मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया गया।
  • जो परिवार SECC के तहत गरीब श्रेणी में नहीं आते थे, उन्हें भी 500 रुपये के मामूली शुल्क पर बिजली कनेक्शन मिला, जिसे बिजली बिल के साथ आसान किस्तों में लिया जा सकता था।

इस संरचना ने यह सुनिश्चित किया कि गरीब परिवारों के लिए बिजली कनेक्शन का खर्च बाधा न बने, साथ ही बाकी घरों तक भी पहुंच बनी रहे।

लाभार्थियों को क्या मिला?

सौभाग्य के तहत जुड़ने वाले हर घर को सिर्फ एक तार या मीटर नहीं मिला, बल्कि इसमें LED लाइट, एक DC पंखा और DC पावर प्लग जैसी जरूरी चीजें भी शामिल थीं। साथ ही पांच साल तक मीटर की मरम्मत और रखरखाव का समर्थन भी दिया गया।

आवेदन की प्रक्रिया क्या थी?

जब यह योजना सक्रिय थी, तो आवेदन प्रक्रिया काफी सरल थी:

1. राज्य बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) ने SECC 2011 डेटा का उपयोग करके उन घरों की पहचान की जहां बिजली नहीं थी।

2. इच्छुक परिवार डिस्कॉम कर्मचारियों से संपर्क कर सकते थे या ग्राम/वार्ड स्तर पर आयोजित शिविरों में आवेदन कर सकते थे।

3. पहचान पत्र, पता प्रमाण और पात्रता से संबंधित दस्तावेजों को जमा करना होता था।

4. सत्यापन के बाद, घर पर मीटर और स्टार्टर किट के साथ कनेक्शन इंस्टॉल कर दिया जाता था।

सौभाग्य योजना की प्रगति और कवरेज

सरकारी डेटा के अनुसार, मार्च 2019 तक लगभग सभी पहचाने गए घरों में बिजली पहुंच चुकी थी। केवल छत्तीसगढ़ के कुछ नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से कुछ घर बचे थे।

बाद के वर्षों में, सात राज्यों - असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ने बताया कि कई परिवारों ने बाद में कनेक्शन के लिए आवेदन किया, जिन्हें भी मंजूरी दी गई। मार्च 2021 तक इन राज्यों ने 100% घरेलू विद्युतीकरण पूरा कर लिया।

विद्युत मंत्रालय के अनुसार, सौभाग्य योजना के तहत कुल 2.86 करोड़ से अधिक परिवारों को बिजली कनेक्शन प्रदान किया गया।

वर्तमान स्थिति: योजना अब बंद हो चुकी है

2026 में सौभाग्य योजना के बारे में जानकारी ढूंढने वाले लोगों के लिए यह जानना जरूरी है कि यह योजना अब नए आवेदन स्वीकार नहीं कर रही है। सरकार द्वारा 100% लक्ष्य प्राप्त करने के बाद, यह योजना 31 मार्च, 2022 को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई।

इसका मतलब यह नहीं है कि विद्युतीकरण का काम रुक गया है। सरकार ने 2021 में 'रेवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम' (RDSS) शुरू की है। अब, जिन घरों में बिजली नहीं है, वे RDSS के तहत अपने राज्य की बिजली वितरण कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 'सार्वभौमिक विद्युतीकरण' का मापन उन लोगों पर आधारित था जिन्होंने आवेदन किया था। जागरूकता की कमी या अन्य कारणों से जो घर उस समय छूट गए, वे वर्तमान में नई योजनाओं के तहत आवेदन करने के पात्र हैं।

ग्रामीण परिवारों पर वास्तविक प्रभाव

लाखों परिवारों के लिए सौभाग्य का मतलब था कि बच्चे अंधेरे के बाद पढ़ सके, घरेलू कामकाज आसान हो गए और पंखे जैसी बुनियादी सुविधा मिली। इसने सूचना और संचार तक बेहतर पहुंच बनाने में भी मदद की।

हालांकि, बिजली कनेक्शन के बाद बिल का प्रबंधन करना भी जरूरी है। अपना मासिक बिजली बिल अनुमानित करने के लिए आप LabhGrow के 'Electricity Bill Calculator' का उपयोग कर सकते हैं।

मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • सौभाग्य योजना 25 सितंबर, 2017 को शुरू की गई थी।
  • SECC 2011 के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त, जबकि अन्य को 500 रुपये की किस्तों पर कनेक्शन मिला।
  • योजना के तहत लगभग 2.86 करोड़ परिवारों का विद्युतीकरण हुआ।
  • यह योजना 31 मार्च, 2022 को आधिकारिक तौर पर बंद हो गई।
  • जिनके पास अभी भी बिजली नहीं है, वे RDSS के तहत राज्य बिजली विभाग से संपर्क करें।

निष्कर्ष

सौभाग्य योजना भारत की एक अत्यंत सफल कल्याणकारी योजना रही है, जिसने उन करोड़ों घरों में बिजली पहुंचाई जहां रोशनी का कोई जरिया नहीं था। अब यह योजना समाप्त हो चुकी है और इसकी जगह RDSS ने ली है। यदि आपके क्षेत्र में बिजली की समस्या है, तो अपने स्थानीय बिजली वितरण कार्यालय से संपर्क करना सही कदम होगा।

अधिक जानकारी के लिए -

सौभाग्य फ्री इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन 2026 के लिए आवेदन कैसे करें | PMCare

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Expert Verified
लेखक
लक्ष्य भारद्वाज

लक्ष्य भारद्वाज

कंटेंट हेड (HOC)

भारतीय सरकारी योजनाओं और बैंकिंग नीतियों के विशेषज्ञ वित्तीय विश्लेषक।

lakshyabhardwaj.hoc@labhgrow.in

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    Saubhagya Scheme: Free Electricity Connection Scheme Explained